विश्वास

उत्तरी ब्राजील में वाइका जाति के आदिवासी पाये जाते हैं। वाइका बहुत असभ्य और जंगली माने हैं पर उनके कुछ प्रयोगों में शिक्षित ब्राजीलवासियों ने भी विलक्षणता और सत्यता अनुभव की।

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दो वाइका एपेना नामक एक वृत्त की छाल लेकर उसे एक नली में रखते हैं। नली का एक सिरा एक अपनी नाम में रखता है। दूसरा अपने मुँह में, मुँह वाला उस पर फूँक मारता है, जिससे एपेना दूसरे वाइका की नाक में घुस जाती है। पहले तो उसे चक्कर आते हैं, परंतु बाद में वह स्थिर हो जाता है। इसके बाद उसे ऐसा लगता है, जैसे उसके शरीर में विचित्र शक्ति आ गई हो और वह चिड़ियों की तरह आकाश (अतीन्द्रिय लोक) में उड़ रहा हो। हजारों फुट लंबा और करोड़ों हाथियों की शक्ति वाला अनुभव करता है। जब तन्द्रा टूटती है तो वह हाकुल (महान् आत्माओं) से हुई बातचीत का विवरण सुनाता है। कई बार कई बातें बड़ी विलक्षण और सत्य पाई जाती हैं। ऐसे प्रयोग अब वहाँ के शिक्षित भी करते हैं। उनका विश्वास है कि इस औषधि से मन, शरीर, कोशिका-शक्ति संस्थान से संबंध जोड़ लेता है, उसी से यह विचित्र अनुभूतियाँ होती हैं।


निश्छल आत्मा स्वयमेव देव-शक्ति :-

अमेरिकी राष्ट्रपति वाशिंगटन के कुटुम्ब में दो बहनें, जिनका नाम जान और वर्जिना था, अपने दोनों भाइयों फ्रेड और जैक से बहुत स्नेह रखती थीं। भाई-बहनों के इस प्रेम में कहीं कोई स्वार्थ या मोह की भावना न थी। विशुद्ध प्रेम कल्याण का भाव था।

एक दिन की बात है, दोनों बहनें घर पर थीं। भाई वहाँ से बहुत दूर अपने काम पर किसी दूसरे शहर में थे। अचानक अस्पताल से फोन आया- ‘‘वहाँ कोई ऐसा जख्मी आदमी पड़ा है, उसका मुख इस तरह कुचल गया है कि पहचानना कठिन हो रहा है। किन्तु वह तुम्हारे पिता का नाम लेता है, इसलिये अस्पताल आकर फौरन उसकी पहचान कर लो।”

दोनों बहनें किसी अज्ञात भय से काँप उठीं। मन में भय समा गया, कहीं जैक या फ्रेड में से तो कोई नहीं है। जाने से पूर्व दोनों बहनों ने भगवान से प्रार्थना की- ‘‘हे प्रभु! ऐसा न हो कि वह हमारा भाई हो।” इसके बाद भरे आँसुओं से वह अस्पताल पहुँचीं। वहाँ जाकर पता चला कि वह उनके घर का नौकर था। और वह किसी वाहन दुर्घटना में कुचल गया था। उनके पहुँचते-पहुंचते उसकी मृत्यु हो गई, पर दोनों बहनों का तब भी अपने भाइयों की बड़ी याद आती रही।

कहते हैं सच्चे हृदय की याद में इतनी शक्ति होती है कि वह एक हृदय का संदेश दूसरे हृदय तक बेतार के तार पहुँचा देती है। घर पहुँचे अभी दो क्षण मुश्किल से बीते होंगे कि जैक का फोन आया। उसने बताया- ‘‘मुझे ऐसा लग रहा है कि तुम दोनों मुझे बुला रही हो, बताना तुम दोनों कुशलमंगल से तो हो।”

दोनों बहने आश्चर्यचकित थीं कि उनकी अन्तर-वाणी जैक तक कैसे पहुँच गई। उसकी तरफ से आश्वस्त बहनों का ध्यान अब फ्रेड का भी पत्र आया उसने भी लिखा था- ‘‘मुझे कई दिन से ऐसा लग रहा है कि तुम दोनों मेरी याद कर रही हो- लिखना अच्छी तो हो।”


स्वप्न और अदृश्य प्रेरणा

स्वप्नों और अदृश्य प्रेरणाओं द्वारा जिन व्यक्तियों को किन्हीं महत्वपूर्ण विषयों की प्रेरणा प्राप्त होती है, उन सबकी यही सम्मति है कि जिन व्यक्तियों में पारस्परिक हार्दिक प्रेम, स्नेह होता है, वे दूर रहते हुए भी एक-दूसरे के सुख-दुःख की जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। युद्ध में जो व्यक्ति मारे जाते हैं, उनमें से अनेकों के देहान्त की सूचना किसी अदृश्य और अज्ञात शक्ति द्वारा उनके प्रिय-जनों को मिल सकती है। इस तरह के उदाहरण योरोप में भी बहुत से मिल चुके हैं, यद्यपि वहाँ कि निवासी ईसाई धर्म के सिद्धाँतों के कारण मृत व्यक्तियों की आत्मा के स्वतंत्र रूप से कहीं आने-जाने में विश्वास नहीं रखते। तो भी जिन लोगों के साथ ऐसी घटनायें होती हैं, वे उसका कारण किसी अलौकिक शक्ति को ही मानते हैं।

हाल ही में अमरीका की ‘चमत्कारी और गूढ़ घटनाओं’ की जाँच करने वाली संस्था ने इस प्रकार की जिन बहुसंख्यक घटनाओं का वर्णन एकत्रित किया है, उससे भी इस मान्यता की सचाई सिद्ध होती है। उन्होंने एक स्कूल मास्टर का हाल बतलाया है, जो अपनी माँ के घर से 30 मील के फासले पर एक कस्बे में नौकरी करता था। एक दिन सुबह ही उसके मन में यह विचार आया कि उसकी माँ बीमार है और उसकी याद कर रही है। उसने माँ के गाँव जाने का निश्चयकर लिया। पर उस समय वहां के लिये कोई सवारी नहीं मिल सकती थी। इसलिये उसने अपने दामाद को टेलीफोन करके अपनी मोटर लाने को कहा। दामाद ने कहा कि “इस समय मौसम बड़ा खराब है और तूफान आने वाला है” पर मास्टर को अपनी माँ के विषय में ऐसी प्रेरणा हो रही थी कि उसने अत्यंत आग्रह करके दामाद को बुला ही लिया। रास्ते में उनको भयंकर तूफान का सामना करना पड़ा। जब वे घर पहुँचे तो माँ वास्तव में बहुत बीमार थी और इन लोगों के प्रयत्न से बड़ी कठिनाई से उसकी प्राण रक्षा हो सकी।

Akhandjyoti – 1968 –